!!!!!!!!सोनिया गांधी के पास पावर है,
लेकिन
ज़िम्मेदारी नहीं है
और मनमोहन सिंह की पास ज़िम्मेदारी है तो पावर नहीं है,
अब और अधिक नहीं चल सकती. यह व्यवस्था यूपीए-1 के दौरान तो कामयाब रही,
क्योंकि आज के मुक़ाबले तब के गठबंधन के सहयोगियों के कुछ सिद्धांत थे.
जैसा कि अब नहीं है.
पिछले कुछ महीनों में राजनीति का जन सरोकारों से मानो
नाता खत्म सा हो गया है.----आशीष शुभ
लेकिन
ज़िम्मेदारी नहीं है
और मनमोहन सिंह की पास ज़िम्मेदारी है तो पावर नहीं है,
अब और अधिक नहीं चल सकती. यह व्यवस्था यूपीए-1 के दौरान तो कामयाब रही,
क्योंकि आज के मुक़ाबले तब के गठबंधन के सहयोगियों के कुछ सिद्धांत थे.
जैसा कि अब नहीं है.
पिछले कुछ महीनों में राजनीति का जन सरोकारों से मानो
नाता खत्म सा हो गया है.----आशीष शुभ
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