Thursday, May 12, 2011

सरकार -सरकार -क्या है ! ये सरकार
क्या हम लोगों ने कभी यह सोंचने की जरुरत की, क्यों केंद्र कि सरकार अन्ना हजारे के आमरण अनशन के पहले ही दिन से बौखला गई, बौखलाहट का कारण था लोग अन्ना हजारे के आन्दोलन से जुड़ने लगे थे, लोगों के अन्दर में जो केंद्र सरकार के प्रति आक्रोश था वह सड़क पर आने लगा था अभी टोलियाँ भीड़ में तब्दील भी नहीं हुई थी कि आनन फानन में केंद्र कि सरकार अन्ना हजारे कि सभी मांगो को मान ली. क्यों कि अन्ना का आन्दोलन एक बहुत बड़ा रूप लेने जा रहा था शायद जयप्रकाश नारायण के भी आन्दोलन से बड़ा और कांग्रेस ने १९७४ में आन्दोलन का हश्र देखी है, यही कारण था कि अन्ना के आन्दोलन को दबाया गया है, जनता कि आवाज़ को इन कांग्रेसियों ने और इनके साथ ही सत्ता में भागीदार बने वो सभी राजनितिक पार्टियों ने मिलकर दबाया है, अब वो ही कांग्रेसी लोकपाल का विरोध कर रहे है तो सानिया गाँधी लोकपाल का समर्थन कर रही है. और यह लोकपाल बिल संसद में ही ना पास होना है, क्या यह लोकपाल बिल पास हो जायेगा, शायद नहीं, क्यों कि संसद में भ्रष्ट राजनेतावों कि संख्या ज्यादा है और इक्के दुक्के ईमानदार सांसद है तो उनके वोट से लोकपाल बिल पास नहीं होने वाला है, तो फिर कांग्रेस अगले लोक सभा चुनाव में लोकपाल बिल का ही मुद्दा सामने लाएगी और कहेगी मेरी पार्टी तो लोकपाल बिल पास कराना चाहती थी लेकिन विपक्झ और कुछ अपने सरकार में शामिल सांसदों ने नहीं चाहा इस लिए लोकपाल बिल पास नहीं हो शका इसलिए आप कांग्रेस पार्टी को इतना बहुमत दिजिये ताकि संसद में लोकपाल बिल को पास करा सकूँ. एक तरह से देखा जाय तो अन्ना हजारे यह लड़ाई हार चुके है और केंद्र में बैठी सरकार जनता कि आवाज़ दबाने में कामयाब रही है.---आशीष शुभ

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