
आप मानें या न मानें पर हकीकत यही है कि हमारी सरकार मुन्नी से 'खासा प्रभावित' हुई है। मुन्नी की बदनामी को उसने गहराई से 'आत्मसात' कर लिया है। एक तरफ दबंग में मुन्नी बदनाम हुई और दूसरी तरफ महँगाई पर हमारी सरकार। दोनों ही मामलों में 'बदनामी' मूल कारण रहा। और मजा देखिए कि बदनाम होकर भी दोनों ने जनता के बीच बेहद 'नाम' कमाया।
सारा का सारा मीडिया कभी मुन्नी पर फोकस हो जाता, तो कभी सरकार पर। अपनी जिंदगी में पहली बार मैंने जनता को किसी की बदनामी पर इतना थिरकते, बहकते और कोसते हुए देखा है।
मुन्नी मेरी निगाह में इसलिए भी 'महान' है कि उसने हमारी सरकार को बदनाम होने का 'सलीका' सिखाया। बदमान होकर भी कैसे अपने नाम को चमकाया जा सकता है, इसकी 'आदत' डलवाई। दरअसल, बदनामी टाइप मामलों में 'आदत का पड़ना' बहुत मायने रखता है। अगर आपमें किसी 'खास आदत' को आत्मसात करने की हिम्मत नहीं, तो आप जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते। बदनामी हो या नकामी, हमें हर आदत के बीच रहने का सलीका आना ही चाहिए।
यह बात सही है कि जिसे बदनामी मिलती है, उसे नाम भी खूब मिलता है। बदनामी के बहाने मिले नाम की बात ही 'कुछ और' है। गुजर गए वो जमाने जब व्यक्ति या सरकार की पहचान अपनी-अपनी अच्छाइयों के लिए हुआ करती थी, अब अपनी बदनामियों से ही सामने वाला पहचाना जाता है। अलां गली की मुन्नी और फलां गली का मुन्ना तब तक मोहल्ले वालों की 'निगाह' में नहीं चढ़ पाते, जब तक कि वे किसी 'खास बात' पर बदनाम न हो जाएँ। यही हाल हमारी सरकार का है।
खामोशी के साथ चलती सरकार कभी किसी की निगाह में नहीं चढ़ पाती। सभी ताना मारते रहते हैं कि 'यह कैसी सरकार है कुछ करती ही नहीं।' इसलिए 'कुछ करने' और 'निगाहों में चढ़ने' के लिए महँगाई, काला धन, भ्रष्टाचार, घोटाला जैसे 'बदनामी टाइप मुद्दों' का होना बेहद जरूरी है ताकि जनता के साथ-साथ विपक्ष को भी लगे कि हाँ, सरकार 'कुछ' कर रही है।
यकीन करें, मैं जब और जहाँ भी मुन्नी या सरकार को इस तरह से बदनाम होते देखता हूँ, मुझे वो मशहूर गाना याद आ जाता है कि जो है नाम वाला वही तो बदनाम है। इसीलिए नाम के साथ बदनामी का चलना बेहद जरूरी है। मुझे ताउम्र इस बात का मलाल रहेगा कि हाय! मैं भी मुन्नी और सरकार की तरह बदनाम क्यों न हुआ। खैर कोई बात नहीं, मुझे प्रसन्नता है कि हमारी सरकार अपनी बदनामी को इंजॉय कर रही है। विपक्ष उसकी बदनामी में ही चार-चाँद लगा रहा है।
ऐ खुदा, हमारी मुन्नी और सरकार की बदनामी को यूँ ही सलामत रखना। -----आशीष शुभ
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