जियो एसे की कल ही मरना हैं ,
आसमान मूर्ख क्यों हैं क्यों?
पानी गीला- क्यों ?
जमीन गोल क्यों?
आग में गर्मी,
क्यों?
दो और दो चार
क्यों ?
पेड़ हो गए कम-
क्यों ?
दिन है- तो
यह रात क्यों?
चाँद एक
क्यों?
नदिया बहती
क्यों ?
रोशनी होती
क्यों?
बर्फ गिरती-
क्यों?
हम लड़ते
क्यों?
और रुठते
क्यों?
तारे टूटते
क्यों?
बादलों में बिजली-
क्यों?
सन्नाटा-
सुनाई नहीं देता,
और आशीष शुभ -
दिखाई नहीं देता.
सोचा है क्या कभी?
होता है
यह सब-
क्यों?
सोचा है यह माजरा,
यह सब-गोल माल?
क्यों क्यों ???
सोचा नहीं है तो-
अब तो सोचो,
अब ही सोचो-----आशीष शुभ
आसमान मूर्ख क्यों हैं क्यों?
पानी गीला- क्यों ?
जमीन गोल क्यों?
आग में गर्मी,
क्यों?
दो और दो चार
क्यों ?
पेड़ हो गए कम-
क्यों ?
दिन है- तो
यह रात क्यों?
चाँद एक
क्यों?
नदिया बहती
क्यों ?
रोशनी होती
क्यों?
बर्फ गिरती-
क्यों?
हम लड़ते
क्यों?
और रुठते
क्यों?
तारे टूटते
क्यों?
बादलों में बिजली-
क्यों?
सन्नाटा-
सुनाई नहीं देता,
और आशीष शुभ -
दिखाई नहीं देता.
सोचा है क्या कभी?
होता है
यह सब-
क्यों?
सोचा है यह माजरा,
यह सब-गोल माल?
क्यों क्यों ???
सोचा नहीं है तो-
अब तो सोचो,
अब ही सोचो-----आशीष शुभ
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